Home बिहार गठबंधनों में शामिल दलों में अपने ही सहयोगियों को कमजोर बताने की मची होड़

गठबंधनों में शामिल दलों में अपने ही सहयोगियों को कमजोर बताने की मची होड़

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पटना ।  बिहार विधानसभा चुनाव में दो बड़े गठबंधनों का दिलचस्प पहलू उभर कर सामने आया है कि इसमें शामिल दलों में अपने ही सहयोगियों को कमजोर बताने की होड़ मची हुई है।

राष्‍ट्रीय लोक समता पार्टी को मलाल है कि उसकी ताकत की कद्र ही नहीं हो रही है। कांग्रेस कह रही है कि राष्‍ट्रीय जनता दल की तुलना में उसका जनाधार बढ़ गया है।

लोक जनशक्ति पार्टी कह रही है कि उसकी नजर में 15 साल से सत्ता का संचालन करने वाले जनता दल यूनाइटेड का कोई खास जनाधार नहीं बचा है।

सभी दलों के पास सहूलियत वाले चुनावी आंकड़े हैं, जिनका इस्तेमाल वे खुद को असरदार बनाने के लिए कर रहे हैं। आरजेडी के साथ कांग्रेस भी अतीत के सुनहरे पन्ने को ही समझौते के वक्त खोल कर रखना चाहती है। यह हाल कमोवेश सभी दलों का है।

जेडीयू भी 2014 के लोकसभा चुनाव के परिणामों को याद नहीं रखना चाहता। भारतीय जनता पार्टी को 2015 के विधानसभा चुनाव परिणाम की चर्चा से डर लगता है।

एलजेपी के पास 2005 के फरवरी में हुए विधानसभा चुनाव का वह आंकड़ा है, जिसमें उसके 29 उम्मीदवार विधायक बन गए थे, लेकिन वह उसी साल अक्टूबर में हुए विधानसभा चुनाव के उस आंकड़े का जिक्र नहीं कर सकती, जिसमें उसके सिर्फ 10 उम्मीदवार जीते थे।

आरएलएसपी को 2014 के लोकसभा चुनाव का वह परिणाम बहुत अच्छा लगता है, जब उसके सभी तीन उम्मीदवार चुनाव जीत गए थे। उसे 2015 के विधानसभा और 2019 के लोकसभा चुनाव का परिणाम याद नहीं रहता है, जब वह क्रमश: दो और शून्य पर सिमट गई थी।

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